॥ दुर्गा माता की आरती ॥

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
जय अम्बे गौरी…॥
कंचन थार विराजत, अग्नि-दीप झरता।
रतन-जड़ित सिंहासन, अम्बे शीतल भरता॥
जय अम्बे गौरी…॥
माँ जगदम्बे भवानी, श्यामा गौरी माता।
वरदानी भवदानी, त्रिभुवन में विख्याता॥
जय अम्बे गौरी…॥
चित्त में ध्यावत नित तुमको, भवभय हारिणि अम्बे।
दीनों के दुःख हरने को, दुष्ट दलन भव-अम्बे॥
जय अम्बे गौरी…॥
जो कोई तुमको ध्यावे, सुख-सम्पत्ति पावे।
मनवांछित फल पाकर, भव-सागर तर जावे॥
जय अम्बे गौरी…॥
नारद ऋषि तुमको ध्यावत, ब्रह्मा शिव पूजत।
विष्णु देव सदा सेवत, निज भक्ति भर सूजत॥
जय अम्बे गौरी…॥
जो कोई श्रद्धा से गावे, भक्ति भाव से लावे।
जगदम्बे तुम वैभव, संकट हरनि भवानी॥
जय अम्बे गौरी…॥
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